Unit-6 रोमन साम्राज्य Part-1
- इस साम्राज्य का विस्तार पूरे दक्षिणी यूरोप के अलावा उत्तरी अफ्रीका और अनातोलिया के क्षेत्र थे।
• फारसी साम्राज्य इसका प्रतिद्वंदी था जो फ़ुरात नदी के पूर्व में स्थित था।
• रोमन साम्राज्य में अलग-अलग स्थानों पर लातिनी और यूनानी भाषाएँ बोली जाती थी
• और सन् 130 में इसने ईसाई धर्म को राजधर्म घोषित कर दिया था।
· रोमन साम्राज्य 500 ई.पू. से लेकर एक ईसवी तक चला।
· 500 ई.पू. में गणतन्त्र की स्थापना हुई।
· रोमन साम्राज्य का केन्द्र इटली था।
· रोम के आरम्भिक चरण में लैटिन और एट्रस्कन लोगों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
· रोम इटली के मध्य भाग के ताइबर (Tiber) नदी के तट पर बसा हुआ था,
· इस शहर की स्थापना 753 ई.पू. में हुई थी।
· रोम में 510 ई.पू. में राजतन्त्र को समाप्त करके गणतन्त्र की स्थापना की गई थी।
· इस तिथि के बाद रोम में कुलीनतन्त्रीय शासन की स्थापना हुई।
· शासन पर रोम के धनी लैटिन अभिजात वर्ग का कब्जा था।
· कॉन्सुल उन दो लोगों को कहा जाता था, जो इस सरकार के मुखिया होते थे
· और इनका चुनाव प्रतिवर्ष होता था ।
· रोमन साम्राज्य 500 वर्षों तक कायम रहा।
· यह साम्राज्य शक्तिशाली और विशाल था।
आरम्भिक चरणों में रोमन साम्राज्य के विस्तार
· इसके विस्तार को दो चरणों में बांटा जाता है-
· (1) पहला चरण 500 से 280 ई.पू. तक चला,
· (2) दूसरा चरण 280 ई.पू. से द्वितीय शताब्दी ई.पू. तक चला।
· रोमन साम्राज्य ने अपने प्रसार के प्रथम चरण में पूरे इतालवी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों को उपने कब्जे में लेने का प्रयास किया।
· उसका यह प्रयास दो शताब्दियों तक चलता रहा
· और रोमन साम्राज्य ने इसकी शुरुआत मध्य इटली पर अपना अधिकार कायम करके की।
· इस प्रकार का रोमन साम्राज्य की रणनिति के तहत उसने लैटिन भाषायियों से गठजोड़ किया।
· इससे रोम को गैर-लैटिन राज्यों पर आक्रमण करने के लिए संसाधन प्राप्त हो गये।
· लगभग 10 वर्षों के लम्बे संघर्ष के बाद वेई पर अधिकार कर लिया गया, जो रोम की एक महत्त्वपूर्ण विजय थी।
· वेई रोम से सटा हुआ एक एट्रस्कन शहर था और यह रोम का पुराना दुश्मन भी था।
· इस विजय से रोम को बहुत फायदा हुआ।
· अब रोम वेई की भूमि और संसाधन अपने प्रसार के लिये इस्तेमाल कर सकता था और अपने विस्तार को तेजी से पूरा कर सकता था।
· इस प्रथम चरण में मध्य इटली के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर लिया गया
· और रोम का मध्य इटली पर कब्जा 295 ई.पू. तक हो गया।
· इसके बाद उसने अपना विस्तार दक्षिण इटली की ओर करना चाहा।
· इस क्षेत्र में कुछ यूनानी बस्तियां भी थीं। इन यूनानियों ने रोम के साथ संघर्ष भी किया।
· एक घमासान युद्ध भी हुआ और इसके बाद यूनानी रोमन साम्राज्य के अधिकार क्षेत्र में आ गए।
· इसी के साथ रोमन साम्राज्य के विस्तार का प्रथम चरण पूरा होता है।
· दूसरे चरण में रोमनवासी अपना प्रसार भूमध्यसागरीय क्षेत्र में करना चाहते थे।
· इस क्षेत्र पर कार्थेजिनियों का अधिकार था और दोनों के बीच लड़ाई छिड़ गयी।
· कार्थेज एक फोनिशियाई व्यापारिक बस्ती थी जो 9वीं शताब्दी ई.पू. में स्थापित हुई थी
· पश्चिमी भूमध्य सागर के अधिकांश हिस्से इसमें शामिल थे।
· इसमें सिसली और स्पेन जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र भी शामिल थे।
· दक्षिणी इटली में अपनी स्थिति मजबूत करने के बाद जब रोम ने सिसली पर कब्जा करना चाहा - तो कार्थेजिनियाई साम्राज्य से उसका संघर्ष हुआ और यह लड़ाई लम्बी चली ।
· कार्थेज को हराकर ही पश्चिमी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में प्रवेश किया जा सकता था, क्योंकि कार्थेज का अधिकार अधिकांश भूमध्यसागरीय क्षेत्रों पर था।
· रोम और कार्थेज के बीच हुई लड़ाई एक शताब्दी तक चली, जिन्हें प्यूनिक के युद्धों के नाम से जाना जाता है।
· प्यूनिक के कुल तीन युद्ध हुए।
· इसमें पहला युद्ध 264-241 ई.पू. में हुआ
· दूसरा 218-201 ई.पू. में और
· तीसरा व अन्तिम युद्ध 149-146 ई.पू. में हुआ।
· तीसरा युद्ध समाप्त होते-होते कार्थेजिनियाई साम्राज्य पूरी तरह से नष्ट हो गया।
· इसके इलाकों पर रोम का कब्जा हो गया।
· इस दौरान रोम के हाथ कुछ महत्त्वपूर्ण क्षेत्र लगे जिसमें सिसली, स्पेन और अफ्रीका थे।
· रोम ने मकदूनिया और यूनानी राज्यों को अपने अधिकार में कर लिया
· 147 ई.पू. में मकदूनिया को रोमन साम्राज्य में मिला लिया गया।
· यूनानी राज्यों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से रोमन साम्राज्य का अधिकार हो गया,
· मिस्र के सम्बन्ध में रोमन साम्राज्य की नीति यह रही कि मिस्र पर उस समय टोलेमिद राजवंश का शासन था
· और रोमन साम्राज्य ने इसे संरक्षण में ले लिया था,
· जिसका अर्थ यह हुआ कि मिस्र अपनी विदेश नीति का संचालन स्वयं नहीं कर सकता था।
· पश्चिमी अनातोलिया पर भी रोमन साम्राज्य का अधिकार हो गया और इसे एशिया का प्रान्त बना दिया गया।
· इस प्रकार हम देखते हैं कि दूसरी शताब्दी ई.पू. तक रोमन साम्राज्य का अधिकार क्षेत्र सम्पूर्ण भूमध्यसागरीय क्षेत्र में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हो गया था।
· इसके बाद भी दो शताब्दियों तक रोमन साम्राज्य का विस्तार होता रहा, परन्तु उसमें कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिलता है।
· भूमध्यसागर इस साम्राज्य का केन्द्रबिन्दु बना रहा।
· इस प्रकार हम देखते हैं कि रोमन साम्राज्य का आरम्भिक विस्तार मध्य इटली, दक्षिणी इटली और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों तक हो गया था,
· जो कि रोमन साम्राज्य का विस्तार का सबसे बड़ा चरण था और इससे रोमन साम्राज्य अपने विशाल स्वरूप को धारण करने में कामयाब रहा,
· क्योंकि अब वेइन क्षेत्रों के संसाधनों और भूमि को अपने विस्तार में लगा सकता था।
शासक सूची
· ऑगस्टस सीजर (27 ईसापूर्व - 14 इस्वी)
· टाइबेरियस (14-37)
· केलिगुला (37-41)
· क्लॉडिअस (41-54)
· नीरो (54-68)
· फ़्लावी वंश (69-96)
· नेर्वा (96-98)
· ट्राजन (98-117)
· हेद्रिअन (117-138)
· एन्टोनियो पिएस
· मार्कस ऑरेलियस (161-180)
· कॉमोडोस (180-192)
· सेवेरन वंश (193-235)
· कॉन्सेन्टाइन वंश (305-363)
· वेलेंटाइनियन वंश (363-392)
· थियोडोसियन वंश (379-457)
· पश्चिमी रोमन साम्राज्य का पतन - (395-476)
· पूर्वी रोमन साम्राज्य (393-
1453)
https://www.youtube.com/watch?v=KvUVQaUyS9c&t=36s
THE E NUB
BY VISHWAJEET SINGH


