सामंतवाद पर विभिन्न दृष्टिकोण
1- यूरोप में सामंतवाद के उदय संबंधित पिरेन की अवधारणा
2- मार्क ब्लॉक के अनुसार सामंतवाद
3- जॉर्ज दूबी - सामंतवादी क्रांति की अवधारणा
2- मार्क ब्लॉक के अनुसार सामंतवाद
· फ्रांसीसी इतिहासकार मार्क ब्लॉक (Marc Block)
· वैधानिक विचारधारा और आर्थिक तत्वों से प्रभावित सामंतवाद की अवधारणा से अलग हटते हुए इस परिघटना की एक नई व्याख्या की
· और इसे 'व्यक्ति और व्यक्ति के बीच का गठबंधन माना ।
· ब्लॉक के अनुसार सामंतवाद एक ऐसा सामाजिक परिवेश है जिसमें भू-सम्पदा के अधिकारों के विभाजन के द्वारा राजनीतिक सत्ता का विस्तार किया गया
· और व्यक्तिगत सुरक्षा और अधीनता का संबंध विकसित हुआ।
· पारिवारिक एकता और सामंतवाद के संबंधों की परीक्षा करते हुए ब्लॉक ने कहा है कि सामंतवाद के विकास के साथ-साथ कुनबाई संबंधों के बंधन धीरे- धीरे मजबूत हुए हैं।
· रक्त संबंधों पर समूह बनाए गए जो एक व्यक्ति की सहायता और संरक्षण का आधार बने (रक्त संबंधों के आधार पर होने वाली लड़ाइयों में इसे बड़ी आसानी और प्रभावी तरीके से लामबंद किया जा सकता था ) सुरक्षा देने में राज्य की भूमिका और शक्ति का होना ही इसका कारण था ।
· यह राज्य के स्वामित्व अधिकारों के लिए बाधा भी बना।
· इस आर्थिक गठबंधन का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि कई घरों को मिलाकर एक 'भाईचारा कायम हुआ जो न केवल एक छत के नीचे रहा करते थे और एक ही खेत जोतते थे।
· बल्कि सामूहिक रूप से अपने अधिपति की सेवा करने और बकाए के भुगतान करने की भी इनकी सामूहिक जिम्मेदारी थी ।
· ब्लॉक का मानना है कि 'मानव संबंध' का सिद्धांत जिसमें एक व्यक्ति अपने आप को एक दूसरे शक्तिशाली व्यक्ति के प्रति समर्पित कर देता था पूरे सामंती समाज में फैला हुआ था।
· आमतौर पर सेना अधिकारी उच्च वर्ग के सदस्य थे
· जिनके मातहत (Subordinates)
उनके वसाल काम किया करते थे और वे उनपर पूरी तरह आश्रित थे ।
· इस युग की राजनीतिक जरूरतों और 'मानसिक परिवेश' के कारण आज्ञापालन और सुरक्षा के आदान-प्रदान को विशेष महत्व दिया गया ।
· कृषि अर्थव्यवस्था में मुद्रा विनिमय की प्रथा काफी सीमित थी
· इसलिए वेतन के बदले जमीन दी जाती थी।
· दूसरी ओर समाज का निचला तबका व्यक्तिगत निर्भरता - गुलामी के - कई प्रकार के संबंधों से बंधा हुआ था।
· इस व्यवस्था में इन्हें अपने मालिकों की चाकरी करनी पड़ती थी।
· उनसे जम कर काम लिया जाता था।
· दूसरी ओर इन्हें संरक्षण देने वाले व्यक्तियों के पास अपार प्राधिकार होता था
· और उन्हें ढेर सारा राजस्व भी मिलता था ।
· ब्लॉक - मैनर को अपने आप में एक सामंती संस्था नहीं मानते हैं, (Manor - मेनर वह किला होता था या हवेली होती थी जहाँ लार्ड या स्वामी रहता था। )
· निर्भरता के गठबंधन के इस व्यापक ढांचे में, ब्लॉक ने सामंती समाजों के भीतर और आपस में, खासतौर पर कुलीनों के संगठन की जटिलता या स्वरूप, कृषक निर्भरता की हद और धन भुगतानों के महत्व में काफी अंतर पाया है।
· इस प्रकार ब्लॉक के लिए 'सामंतवाद' मध्ययुगीन समाज व्यवस्था की सम्पूर्ण परिभाषा न होकर स्थानीय परिघटना के तुलनात्मक अध्ययन की एक विधि है।
· ब्लॉक ने इस समग्र ढांचे में समय के साथ-साथ हुए परिवर्तन को भी महत्वपूर्ण माना है ।
· ग्यारहवीं शताब्दी के मध्य में यूरोपीय समाज में गहन और व्यापक परिवर्तन आए,
· ब्लॉक ने दो सामंती कालों का सिद्धांत प्रतिपादित किया।
· हालांकि दूसरे सामंती काल ने पहले काल से पूरी तरह नाता नहीं तोड़ा पर जीवन के लगभग हर क्षेत्र में गुणात्मक प्रगति दिखाई देती है।
· दूसरे काल में अर्थव्यवस्था में विकास हुआ
· जनसंख्या में वृद्धि हुई,
· मानव बस्तियां मजबूत हुईं,
· परस्पर संचार विकसित हुआ,
· व्यापार में बढ़ोत्तरी हुई,
· शहरों का विकास हुआ,
· मुद्रा स्थिति में सुधार हुआ और इस प्रकार सामाजिक मूल्यों में भी तदनुरूप संशोधन हुआ।
· 'क्लासिकी सामंतवाद' के हास या रूपांतरण के साथ-साथ सगोत्रीय समूहों का आकार छोटा होता जा रहा था
· और इस प्रक्रिया में रिश्तेदारी गठबंधन ढीला पड़ता जा रहा था।
· प्रगति और विकास के नए क्षेत्रों में व्यक्ति के उदय का संकेत पहले ही मिल चुका था ।
· लातिन (Latin ) ईसाई धर्म की स्थापना, भाषाई सम्मिश्रण की प्रक्रिया, रोमन कानून में फिर से होती रुचि और अंततः मताधिकार की लगातार मांग ने अलग-अलग अनुपातों में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद की।
· हालांकि मध्ययुगीन समाज के बारे में मार्क ब्लॉक का अध्ययन और विश्लेषण पहले किए गए प्रयासों से बिलकुल अलग और विशिष्ट था
· परंतु बाद में ब्लॉक और उसके सिद्धांत पर जितने काम हुए उनमें अनुसंधानकर्ताओं ने इस सिद्धांत में व्यापक फेरबदल और संशोधन करने का सुझाव दिया।
· इतिहासकारों का मानना है कि ब्लॉक ने सामंती समाज में लगातार धीमी गति से हो रहे परिवर्तनों का तो विस्तृत खाका खींचा है पर इस परिवर्तन या पतन के मूल कारण की चर्चा नहीं की गई है।
· ब्लॉक ने कभी-कभी सामाजिक प्रक्रिया की अंदरूनी गतिशीलता की बात तो कही है पर इस पर ज्यादा बल नहीं दिया है।
· ढीले कालानुक्रम, राज्य की अटल अवधारणा और वंशानुगतता की पुरानी अवधारणा के कारण भी ब्लॉक की आलोचना की जाती है ।
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By- Vishwajeet
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